बाग़-ए-ख़ामोशी-ए-दिल से सुख़न-ए-'इश्क़ 'असद'
नफ़स-ए-सोख़्ता रम्ज़-ए-चमन ईमाई है
“From the heart's silent garden, Asad, love's discourse springs,My fervent breath, the garden's hint, its secret softly brings.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
ऐ असद, दिल की ख़ामोशी के बाग़ से ही प्रेम की बातें निकलती हैं। मेरी जली हुई (गहरी) साँस ही बाग़ के रहस्य का संकेत देती है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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