शर्म तूफ़ान-ए-ख़िज़ाँ रंग-ए-तरब-गाह-ए-बहार
माहताबी ब-कफ़-ए-चश्म-ए-तमाशाई है
“Modesty, an autumn's storm to the joyful hues of spring's garden; It is a moonlight spectacle held within the spectator's eye.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
शर्म वसंत के आनंदमय बाग के रंगीन माहौल के लिए पतझड़ के तूफान जैसी है। हालांकि, यह दर्शक की आंख में समाया हुआ एक चांदनी का नज़ारा है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
