ले चलो मुझ को राह-रवान-ए-अदम — दाग़ देहलवी

ले चलो मुझ को राह-रवान-ए-अदम याँ ठिकाना नज़र नहीं आता

“Take me along, O travellers bound for oblivion, / For here I see no refuge, no place to call my home.”

— दाग़ देहलवी

अर्थ

हे अदम (परलोक/मृत्यु) की राह पर चलने वाले मुसाफ़िरो, मुझे भी अपने साथ ले चलो, क्योंकि यहाँ इस दुनिया में मुझे कोई ठिकाना या आसरा नज़र नहीं आता।

विस्तार

इस शेर में शायर इस दुनिया से इस कदर बेज़ार और तन्हा महसूस कर रहा है कि वह 'अदम' यानी गैर-मौजूदगी और मौत की ओर जाने वाले मुसाफ़िरों से गुज़ारिश करता है कि वे उसे भी अपने साथ ले चलें। इस जहाँ में उसे अपने लिए कोई आसरा, कोई अपनापन या सुकून का ठिकाना नज़र नहीं आता। यह शेर दिल की उस गहरी उदासी को बयां करता है, जहाँ इंसान को ज़िंदगी से ज़्यादा मौत की खामोशी में अपनापन लगने लगता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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