दिल ने इस बज़्म में बिठा तो दिया — दाग़ देहलवी
“My heart has made me take a seat in this gathering; yet rising to depart, I see no way.”
अर्थ
दिल ने मुझे इस महफ़िल में लाकर बैठा तो दिया है, लेकिन अब यहाँ से उठकर जाने की कोई राह नज़र नहीं आ रही है।
विस्तार
यह शेर इश्क़ की उस बेबसी को बेहद सादगी से बयां करता है जहाँ इंसान अपने ही दिल के हाथों मजबूर हो जाता है। दिल की ज़िद पर आशिक़ महबूब की महफ़िल में खिंचा तो चला आया, लेकिन अब वहाँ से उठकर रुख़सत होना नामुमकिन सा लग रहा है। 'नज़र नहीं आता' महज़ रास्ता न दिखने की बात नहीं है, बल्कि यह उस तिलिस्म का ज़िक्र है जहाँ महबूब के दीदार के सिवा दुनिया की कोई और सम्त सूझती ही नहीं।
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