इश्क़ दर-पर्दा फूँकता है आग — दाग़ देहलवी

इश्क़ दर-पर्दा फूँकता है आग ये जलाना नज़र नहीं आता

“Behind the veil, love secretly stokes the flame; this consuming fire remains unseen.”

— दाग़ देहलवी

अर्थ

इश्क़ पर्दे के पीछे छुपकर आग भड़काता है, और उसका यह जलाना किसी को दिखाई नहीं देता।

विस्तार

यह शेर इश्क़ के उस दर्द की बात करता है जो बाहर से दिखाई नहीं देता, मगर अंदर सब कुछ भस्म कर देता है। शायर ने इश्क़ को पर्दे के पीछे छिपकर आग सुलगाने वाले के रूप में दिखाया है, जिसकी तपिश में इंसान चुपचाप जलता रहता है। दुनिया को सब कुछ सामान्य दिखता है, क्योंकि यह एक ऐसी आग है जिसमें न लपटें उठती हैं और न धुआँ—बस रूह अंदर ही अंदर राख हो जाती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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