मुड़ के देखा तो मैं ने कब देखा — दाग़ देहलवी
“When did I ever turn back to look? / Only when I had ventured far beyond the sentinel's gaze.”
अर्थ
मैंने पीछे मुड़कर सिर्फ़ तब देखा जब मैं पहरेदार से बहुत दूर निकल आया था।
विस्तार
इस शेर में पाबंदियों से छूटने की राहत भी है और पीछे छूटी दुनिया की कशिश भी। 'पासबान' यानी पहरेदार दरअसल समाज की कड़ी निगाहों और बंदिशों का प्रतीक है, जिसके साए में मुड़कर देखना भी खतरे से खाली नहीं था। शायर कहता है कि उसने तभी पलट कर देखा जब वह हर खतरे से बहुत दूर निकल चुका था—यानी आज़ादी पा लेने के बाद भी दिल के किसी कोने में अतीत की तरफ देखने की तड़प बाकी रह ही गई।
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ऑडियो
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