तेरे दीवानों का भी लश्कर आज — दाग़ देहलवी
“The legion of your impassioned lovers marched forth today, with what majestic pomp, with what grand array!”
अर्थ
आज तुम्हारे दीवानों का लश्कर कितनी भव्यता और शान-ओ-शौकत के साथ बाहर निकला है।
विस्तार
उर्दू शायरी में आमतौर पर दीवानों को बेहाल, बिखरे हुए और तन्हा दिखाया जाता है, लेकिन यहाँ मंज़र बिल्कुल अनोखा है। शायर ने आशिक़ों को मजलूम समझने के बजाय एक आलीशान लश्कर के रूप में देखा है, जो पूरे ठाठ-बाट, गरिमा और शान से आगे बढ़ रहा है। यह शेर इश्क़ की दीवानगी को किसी कमजोरी की तरह नहीं, बल्कि एक शाही फ़ख़्र और बेबाक हिम्मत के उत्सव की तरह पेश करता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
