रहरव-ए-राह-ए-इश्क़ थे लाखों — दाग़ देहलवी

रहरव-ए-राह-ए-इश्क़ थे लाखों आगे मैं कारवान से निकला

“Hundreds of thousands were travelers on the path of love, yet far ahead of the caravan I forged.”

— दाग़ देहलवी

अर्थ

इश्क़ की राह पर चलने वाले लाखों मुसाफ़िर थे, लेकिन मैं उस पूरे कारवाँ से आगे निकल गया।

विस्तार

मीर यहाँ इश्क़ के रास्ते को एक ऐसा सफ़र बताते हैं जहाँ लाखों मुसाफ़िर एक कारवाँ बनाकर चल रहे हैं। मगर आम आशिक़ों की तरह संभल-संभल कर चलना उनके बस की बात नहीं थी; उनके दिल का दर्द और जुनून इतना गहरा था कि वे भीड़ को पीछे छोड़कर अकेले ही सबसे आगे निकल गए। यह शेर बताता है कि सच्चा और बेपनाह इश्क़ इंसान को महफ़िल से जुदा करके तन्हाई और दीवानगी की एक अलग ही मंज़िल पर पहुँचा देता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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