समझो पत्थर की तुम लकीर उसे — दाग़ देहलवी
समझो पत्थर की तुम लकीर उसे
जो हमारी ज़बान से निकला
“Deem it as etched forever in stone, whatever word has passed from these lips.”
— दाग़ देहलवी
अर्थ
जो कुछ भी हमारी ज़बान से निकला है, उसे पत्थर की लकीर यानी पूरी तरह अटल और पक्का समझो।
विस्तार
इस शे’र में शायर अपने कहे हुए बोलों को 'पत्थर की लकीर' कहकर अपने वादे और उसूलों की दृढ़ता को बयां कर रहे हैं। यह महज़ बात नहीं, बल्कि एक ऐसा पक्का अहद है जिसे वक़्त की कोई भी आंधी मिटा नहीं सकती। इसमें अपनी ज़बान की क़ीमत और मोहब्बत के भरोसे का वह गहरा अहसास झलकता है, जहाँ बोले गए हर लफ़्ज़ को ज़िंदगी भर निभाने का संकल्प होता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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