पड़ गया जो ज़बाँ से तेरी हर्फ़ — दाग़ देहलवी

पड़ गया जो ज़बाँ से तेरी हर्फ़ फिर न अपने मकान से निकला

“Once a word slipped from your tongue, It never stepped out of its dwelling again.”

— दाग़ देहलवी

अर्थ

तुम्हारी ज़बान से जो इल्ज़ाम या बात निकल गई, उसके बाद वह शख्स फिर कभी अपने घर से बाहर नहीं निकला।

विस्तार

अपनों की ज़ुबान से निकला एक लफ़्ज़ भी इंसान की रूह को झकझोर सकता है। इस शेर में शायर उसी गहरे सदमे की बात कर रहा है, जहाँ महबूब की कही कोई बात या इल्ज़ाम आशिक़ के दिल पर इतना भारी पड़ा कि वह शर्म और दर्द के मारे अपने ही घर में सिमट कर रह गया और फिर कभी दुनिया के सामने नहीं निकला।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.