क़सम भी खाई थी क़ुरआन भी उठाया था — दाग़ देहलवी
“An oath was sworn, the Quran itself was raised in pledge, yet today brings that very same denial—just watch and see.”
अर्थ
क़सम भी खाई गई थी और क़ुरआन भी उठाया गया था, लेकिन आज फिर वही इनकार दोहराया जा रहा है; बस देखते जाइए।
विस्तार
यह शेर टूटे हुए वादों और विश्वासघात के गहरे दर्द को बयां करता है। शायर याद करता है कि अपनी वफ़ादारी साबित करने के लिए कभी पवित्र क़ुरआन की क़सम खाई गई थी, लेकिन आज वही इंसान बड़ी बेफ़िक्री से अपनी बात से मुकर गया है। 'देखते जाओ' में एक ख़ामोश और लाचार तंज़ छिपा है, जहाँ दिल टूटने के बाद इंसान सामने वाले की बेवफ़ाई को बस चुपचाप देखने के सिवा कुछ नहीं कर सकता।
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