यही तो चश्म-ए-हक़ीक़त निगर का सुर्मा है — दाग़ देहलवी

यही तो चश्म-ए-हक़ीक़त निगर का सुर्मा है निज़ा-ए-काफ़िर-ओ-दीं-दार देखते जाओ

“This is the very kohl that clarifies the truth-beholding eye: just keep watching the dispute between the infidel and the devout.”

— दाग़ देहलवी

अर्थ

सच्चाई को देखने वाली आँख के लिए यही तो सुर्मा है, बस तुम काफ़िर और धर्मनिष्ठ के बीच के झगड़े को देखते रहो।

विस्तार

शायर यहाँ 'सुर्मा' का बेहद खूबसूरत रूपक इस्तेमाल कर रहे हैं, जो आँखों की रोशनी और समझ को पैना करने का काम करता है। उनका कहना है कि मोमिन और काफ़िर के बीच चल रहे इस अंतहीन झगड़े में किसी एक का पक्ष लेने के बजाय, इसे बस एक तटस्थ दर्शक बनकर देखिए। जब आप इस टकराव को गहराई से परखते हैं, तो इंसानी तंग-नज़री और दुनियावी फरेब समझ आ जाते हैं, जिससे असल हक़ीक़त को देखने वाली आँखें खुल जाती हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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