बहार-ए-उम्र में बाग़-ए-जहाँ की सैर करो — दाग़ देहलवी
“In the springtime of your youth, stroll through the world's fair garden; behold this bower in full bloom, admiring it as you pass.”
अर्थ
अपनी जवानी के दिनों में इस दुनिया रूपी बाग़ की सैर कर लो। यह चमन पूरी तरह खिला हुआ है, इसलिए आगे बढ़ते हुए इसका नज़ारा देखते जाओ।
विस्तार
शायर यहाँ जवानी को बहार के मौसम की तरह और इस दुनिया को एक महकते हुए बाग़ की तरह देखते हैं। वे बड़े अपनेपन से कह रहे हैं कि जब तक उम्र में उमंग और ताज़गी है, इस दुनिया के हुस्न और तजुर्बों का पूरा लुत्फ़ उठा लो। इस ख़ूबसूरत शेर में ज़िंदगी को खुलकर जीने का पैग़ाम है, साथ ही यह एहसास भी कि यह बहार हमेशा नहीं रहेगी, इसलिए हर रंग को जी भर कर महसूस कर लेना चाहिए।
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