सुनी-सुनाई पे हरगिज़ कभी अमल न करो — दाग़ देहलवी
“Never act upon mere hearsay or rumors whispered by; just keep watching the unfolding chronicle of my plight.”
अर्थ
सुनी-सुनाई बातों पर कभी भी अमल मत करो, बल्कि मेरी हालत की ख़बरों को खुद देखते रहो।
विस्तार
इस शेर में शायर बहुत अपनेपन से कहता है कि दुनिया की उड़ती हुई अफ़वाहों या सुनी-सुनाई बातों पर आँख मूंदकर भरोसा मत करो। वह महबूब से गुज़ारिश करता है कि अगर सच जानना है, तो उसके बिखरे हुए हाल को देखो, जो किसी ताज़ा अख़बार की तरह अपनी व्यथा खुद बयां कर रहा है। यहाँ 'हाल का अख़बार' एक खूबसूरत रूपक है, जो यह दर्शाता है कि आशिक़ का दर्द कोई छिपी हुई बात नहीं बल्कि खुली किताब की तरह सबके सामने है।
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