कोई न कोई हर इक शेर में है बात ज़रूर — दाग़ देहलवी

कोई न कोई हर इक शेर में है बात ज़रूर जनाब-ए-'दाग़' के अशआ'र देखते जाओ

“In every single verse, there surely is a subtle art; just keep beholding the couplets of revered master Dāgh.”

— दाग़ देहलवी

अर्थ

जनाब 'दाग़' के शेरों को पढ़ते जाइए, उनके हर एक शेर में कोई न कोई ख़ास बात ज़रूर होती है।

विस्तार

यह शेर उस्ताद शायर दाग़ देहलवी के कमाल-ए-फ़न को एक ख़ूबसूरत नज़राने की तरह पेश करता है। शायर बड़ी आत्मीयता से कहता है कि आप बस दाग़ साहब की शायरी पढ़ते जाइए, आपको हर एक शेर में कोई न कोई ख़ास अंदाज़, अनोखी बात या दिल छू लेने वाली नज़ाकत ज़रूर मिलेगी। यह दाग़ की उस सहज और दिलकश ज़बान की तारीफ़ है, जहाँ कोई भी शेर अधूरा या बेअसर नहीं लगता।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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