बना दिया मिरी चाहत ने ग़ैरत-ए-यूसुफ़ — दाग़ देहलवी
“My devotion has made you the envy of Joseph; just behold now how the market of your beauty thrives.”
अर्थ
मेरी चाहत ने तुम्हें इतना हसीन बना दिया है कि हज़रत यूसुफ़ को भी रश्क हो, अब तुम बस अपने हुस्न की मांग और बाज़ार की रौनक देखते जाओ।
विस्तार
उर्दू शायरी में हज़रत यूसुफ़ को हुस्न की इंतहा माना गया है, लेकिन शायर यहाँ नाज़ से कहता है कि मेरी बेपनाह मोहब्बत ने तुम्हें यूसुफ़ से भी ज़्यादा हसीन और क़ीमती बना दिया है। 'गर्मी-ए-बाज़ार' से मुराद तुम्हारी शोहरत और चाहने वालों की यह बढ़ती हुई भीड़ है, जिसे आशिक़ अपनी ही दीवानगी का करिश्मा बताता है। इसमें एक मीठा सा फ़ख़्र और हल्का सा तंज़ है कि दुनिया आज जिस हुस्न की दीवानी है, उसका असली मुक़ाम तो मेरे इश्क़ ने ही तराशा है।
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