वो मुसीबत सुनी नहीं जाती — दाग़ देहलवी
“That affliction cannot even be heard told, / The very calamity that my eyes behold.”
अर्थ
जिस मुसीबत को मैं अपनी आँखों से देख रहा हूँ, वह ऐसी है कि उसका ज़िक्र सुनना भी बर्दाश्त नहीं होता।
विस्तार
शायर यहाँ अपने ग़म की शिद्दत को बयाँ करने के लिए सुनने और देखने का बेहद गहरा फ़र्क़ सामने लाता है। उसका कहना है कि जिस दर्द या तबाही को वह अपनी आँखों से देख रहा है और ख़ुद भुगत रहा है, लोग तो उसका ज़िक्र भर सुनने से काँप उठते हैं। यह शेर सीधे दिल पर चोट करता है—यह अहसास दिलाते हुए कि जब किसी दास्ताँ को सुनना ही इतना भारी है, तो उसे झेलने वाले के दिल पर क्या गुज़र रही होगी।
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