जब हुई सुब्ह आ गए नासेह — दाग़ देहलवी

जब हुई सुब्ह आ गए नासेह उन्हीं हज़रत को देखता हूँ मैं

“At the break of dawn arrived the pious preacher; I merely sit and gaze upon that reverend gentleman.”

— दाग़ देहलवी

अर्थ

जैसे ही सुबह हुई, नसीहत देने वाले आ पहुँचे; अब मैं बस इन्हीं हज़रत को देख रहा हूँ।

विस्तार

आशिक़ ने पूरी रात हिज्र के दर्द या महफ़िल की मदहोशी में काटी है, और जैसे ही भोर हुई, नसीहत देने वाले 'नासेह' साहब नेक सलाह का पुलिंदा लेकर आ धमके। शायर उनसे कोई बहस नहीं करता, बल्कि एक गहरी थकावट और तंज़ भरी ख़ामोशी के साथ बस उन्हें टकटकी बांधे देख रहा है। इस शेर में आशिक़ की बेज़ारी और नासेह की बेमौक़ा संजीदगी के बीच का हल्का-फुल्का तंज़ बहुत ख़ूबसूरती से झलकता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.