निगहबाँ से भी क्या हुई बद-गुमानी — दाग़ देहलवी

निगहबाँ से भी क्या हुई बद-गुमानी अब उस को तिरे साथ कम देखते हैं

“What suspicion could have fallen even upon the guard, that now by your side he is so rarely seen?”

— दाग़ देहलवी

अर्थ

पहरेदार या रखवाले से भी ऐसा क्या शक या अविश्वास हो गया है कि अब हम उसे तुम्हारे साथ बहुत कम देखते हैं?

विस्तार

शायर यहाँ बड़ी नज़ाकत और मीठे तंज़ के साथ महबूब की बे-एतबारी पर चुटकी ले रहा है। आम तौर पर 'निगहबाँ' या पहरेदार का काम आशिक़ों को महबूब के पास फटकने से रोकना होता है, लेकिन अब वह ख़ुद ही महबूब के साथ नज़र नहीं आ रहा। शायर हैरान होकर पूछता है कि आख़िर उस पहरेदार पर ऐसा क्या शक हुआ जो उसे भी हटा दिया गया—क्या महबूब का वहम इस कदर बढ़ गया है, या फिर वह रखवाला भी हुस्न के जादू का शिकार होकर आशिक़ बन बैठा था?

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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