सलामत रहे दिल बुरा है कि अच्छा — दाग़ देहलवी

सलामत रहे दिल बुरा है कि अच्छा हज़ारों में ये एक दम देखते हैं

“May the heart be spared, whether wicked or good; in thousands, we behold this single breath of life.”

— दाग़ देहलवी

अर्थ

दिल चाहे अच्छा हो या बुरा, वह सलामत रहे; क्योंकि हज़ारों के बीच हम इसी एक सांस या ज़िंदगी को देखते हैं।

विस्तार

शायर यहाँ दिल की सलामती की दुआ माँग रहा है, बिना यह परवाह किए कि वह अच्छा है या बुरा। हज़ारों बेपरवाह चेहरों और रस्मों-रिवाजों की भीड़ में यही एक धड़कता हुआ दिल है, जो ज़िंदगी की असल रूह और सच्चे एहसास को थामे हुए है। यह शेर हमें समझाता है कि किसी भी नैतिक नफ़ा-नुकसान से परे, दिल का ज़िंदा रहना और शिद्दत से महसूस करना ही सबसे अनमोल है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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