वो नादान अंजान भोले हैं ऐसे — दाग़ देहलवी

वो नादान अंजान भोले हैं ऐसे कि सब शेवा-ए-दुश्मनी जानते हैं

“So naive, artless, and innocent they seem, yet well they know every craft of enmity.”

— दाग़ देहलवी

अर्थ

वे दिखने में इतने नादान, अनजान और सीधे-सादे हैं, लेकिन दुश्मनी निभाने के सारे तौर-तरीके अच्छी तरह जानते हैं।

विस्तार

इस शेर में शायर ने महबूब की मासूमियत और उसकी सितमगरी के दिलचस्प विरोधाभास को पेश किया है। देखने में तो महबूब बिल्कुल अनजान और भोला-भाला लगता है, मानो उसे दुनिया के छल-कपट की कोई समझ ही न हो। मगर दिल दुखाने और दुश्मनी निभाने के सारे सलीके वह इतनी खूबी से जानता है कि आशिक उसकी इस भोली अदा पर भी हैरान और घायल रह जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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