जिगर पर दाग़ लब पर दूद-ए-दिल और अश्क दामन में तिरी महफ़िल से हम मानिंद-ए-शम्अ सुब्ह-दम निकले

“With a scar upon the heart, smoke on the lips, and tears upon the hem, like a candle at the break of dawn, I departed from your gathering.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

जिगर पर ज़ख़्म, होंठों पर दिल की आहों का धुआँ और दामन में आँसू लिए, हम तुम्हारी महफ़िल से सुबह की बुझती हुई शम्अ की तरह निकले।

विस्तार

यहाँ शायर ने महबूब की महफ़िल से अपनी विदाई की तुलना सुबह बुझती हुई शमा से की है, जो रात भर जलकर पूरी तरह ख़त्म हो चुकी है। दिल में जलने का दाग़, होंठों पर ठंडी आहों का धुआँ और दामन में पिघले मोम की तरह आँसू समेटे वह चुपचाप रुख़सत होता है। यह शेर उस ख़ामोश और गहरे दर्द को बयां करता है, जहाँ इश्क़ की आग में ख़ुद को रात भर तपाने के बाद आशिक़ के पास सिर्फ़ अपनी राख और ख़ालीपन बचता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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