दरिया में गिर पड़ा जो मिरा अश्क एक गर्म बुत-ख़ाने लब पे हो गए साहिल के चार पाँच

“When a single scalding tear of mine fell down into the river, four or five idol-temples rose upon the shore's moist lip.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

जब मेरा एक गर्म आँसू नदी में जा गिरा, तो किनारे पर चार-पाँच बुतख़ाने (मंदिर) बन गए।

विस्तार

यह शेर क्लासिकी उर्दू शायरी की कमाल की मुबालग़ा-आराई (अतिशयोक्ति) पेश करता है। शायर कहता है कि उसके दिल का ग़म इतना तपता हुआ था कि जब उसका एक खौलता हुआ आँसू दरिया में गिरा, तो उसकी तपन से किनारे पर बुलबुले उभर आए, जो देखने में बुतख़ानों (मंदिरों) के गुंबद जैसे लगे। पानी के बुलबुलों को इबादतगाहों की शक्ल में देखना इश्क़ के दर्द की शिद्दत को दिखाता है, जो बेजान पानी को भी हैरान कर देने वाले मंज़र में बदल देता है।

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