कहने हैं मतलब उन से हमें दिल के चार पाँच क्या कहिए एक मुँह हैं वहाँ मिल के चार पाँच

“I have just four or five desires of the heart to declare; yet what can I say, when four or five mouths speak as one over there?”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

हमें उनसे अपने दिल की चार-पाँच बातें कहनी हैं, लेकिन हम क्या कहें जब वहाँ चार-पाँच लोग मिलकर एक आवाज़ हो रहे हैं।

विस्तार

आशिक़ के दिल में महबूब से कहने के लिए बस चार-पाँच छोटी-छोटी आरज़ूएँ हैं, लेकिन वहाँ की महफ़िल उसे बेबस कर देती है। महबूब के इर्द-गिर्द बैठे रक़ीब या हमनवा मिलकर एक हो चुके हैं और सब एक ही ज़बान में आशिक़ को चुप कराने पर तुले हैं। यह शेर उस लाचारी को बड़ी नज़ाकत से दिखाता है जहाँ दिल की साफ़ बात दुनिया की साज़िशी एकता के आगे दब जाती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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