न कर ज़ालिम दिल-आज़ारी जो ये दिल मंज़ूर है लेना किसी का दिल जो हाथ आया तो दिलदारी से हाथ आया

“Torment not, O cruel one, if to win this heart is your desire; for if ever a heart was truly won, 'twas won through tenderness and grace.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

हे ज़ालिम, अगर तुझे यह दिल जीतना मंज़ूर है तो इसे दुख मत पहुँचा। किसी का भी दिल अगर कभी हासिल हुआ है, तो वह केवल प्यार और दिलदारी से ही मिला है।

विस्तार

शायर अपने महबूब को बड़ी सादगी और गहराई से समझा रहा है कि अगर तुम्हें मेरा दिल जीतना है, तो सितम ढाना छोड़ दो। दिल कोई ऐसी चीज़ नहीं जिसे ज़बरदस्ती या बेरुखी से जीता जा सके, इसे तो सिर्फ़ नरमी, मुहब्बत और दिलदारी से ही पाया जा सकता है। यहाँ 'दिल-आज़ारी' और 'दिलदारी' का ख़ूबसूरत तज़ाद यह बताता है कि किसी के दिल में जगह बनाने का सच्चा रास्ता सिर्फ़ अपनापन और ख़ुलूस है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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