“Why did the heavens turn so cruel against my humble fate? / Will someone ask the tyrant what this torment gained?”
आसमान (किस्मत) हमारे लिए इतना ज़ालिम क्यों हो गया? कोई उस ज़ालिम से पूछे कि आख़िर इस ज़ुल्म और सितम से उसे क्या हासिल हुआ।
उर्दू शायरी में 'आसमान' को अक्सर बेरहम किस्मत का प्रतीक माना जाता है, जो इंसानों को आज़माती रहती है। शायर यहाँ सिर्फ अपनी तकलीफ़ का रोना नहीं रो रहा, बल्कि सीधे ज़ालिम वक्त से एक चुभता हुआ सवाल कर रहा है कि आख़िर किसी बेबस दिल को तोड़कर उसे हासिल क्या हुआ? इस शेर में लाचारी के साथ-साथ एक शांत मगर पुरअसर अंदाज़ में ज़ुल्म के खोखलेपन को आईना दिखाया गया है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
