है मिरे शोख़ की बालीदा वो काफ़िर आँखें जिस के हम चश्म ज़रा नर्गिस-ए-बादाम न हो

“So wondrously grown and enchanting are my playful love's infidel eyes, that even the almond-eyed narcissus dares not claim to be their peer.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

मेरे शोख़ महबूब की वे काफ़िर आँखें इस क़दर बड़ी और खूबसूरत हैं कि बादामी नरगिस का फूल भी ज़रा उनकी बराबरी नहीं कर सकता।

विस्तार

इस शे'र में आशिक़ अपने चंचल महबूब की मदभरी, क़ातिलाना आँखों की तारीफ़ में डूबकर बात कर रहा है। शायरी में खूबसूरत आँखों की तुलना अक्सर बादाम की बनावट और नरगिस के फूल से की जाती है, लेकिन शायर का कहना है कि उसके माशूक़ की आँखें इतनी हसीन और पुरकशिश हैं कि कुदरत का वह खूबसूरत फूल भी उनकी बराबरी नहीं कर सकता। 'हम-चश्म' का लफ़्ज़ी मतलब बराबरी करने वाला भी है और एक जैसी आँखों वाला भी, जिससे इस तारीफ़ का असर और भी गहरा और दिलकश हो जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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