आज हर एक जो यारो नज़र आता है निढाल अपनी अबरू की वो खींचे हुए समसाम न हो

“If all around, my friends, everyone lies listless and struck down, / Could it be that she has drawn the sharp sword of her arched brow?”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

हे दोस्तो, आज जो हर कोई निढाल और बेदम दिखाई दे रहा है, कहीं ऐसा तो नहीं कि महबूब ने अपनी भौंहों की तलवार खींच ली हो?

विस्तार

शायर अपने दोस्तों से मुख़ातिब होकर पूछता है कि आज महफ़िल या शहर में हर कोई इतना थका-हारा और बेसुध क्यों पड़ा है। उर्दू शायरी की रिवायत में महबूब की ख़मदार भवों (अबरू) को अक्सर तेज़ तलवार (समसाम) से तशबीह दी जाती है। इस शेर में बड़े ही दिलकश और शोख़ अंदाज़ में यह शक जताया गया है कि कहीं महबूब ने अपनी कातिल भौंहों की तलवार तो नहीं खींच ली, जिसके वार से सब के सब एक साथ घायल हो गए हैं।

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