आज तशरीफ़ गुलिस्ताँ में वो मय-कश लाया कफ़-ए-नर्गिस पे धरा क्यूँकि भला जाम न हो

“Today that wine-drinker has graced the garden with his presence; why then should a goblet not rest upon the palm of the narcissus?”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

आज वह मय-कश (शराब पीने वाला) बाग़ में तशरीफ़ लाया है, तो फिर भला नरगिस के फूल की हथेली पर शराब का प्याला क्यों न रखा हो।

विस्तार

इस शेर में शायर ने महबूब के बाग़ में आने से पैदा हुई रौनक का बड़ा ही दिलकश नज़ारा खींचा है। उर्दू शायरी में नरगिस के फूल की बनावट को अक्सर प्याले या हथेली की तरह देखा जाता है; जैसे ही वह मय-कश (शराबी या मतवाला महबूब) बाग़ में क़दम रखता है, नरगिस भी मानो अपनी हथेली पर जाम सजाकर उसका इस्तक़बाल करने लगती है। यह शेर बताता है कि महबूब की मौजूदगी से पूरी कुदरत भी उसी के रंग और मस्ती में रंग जाती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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