पुर-ग़ुरूर ओ पुर-तकब्बुर पुर-जफ़ा ओ पुर-सितम पुर-फ़रेब ओ पुर-दग़ा पुर-मक्र ओ पुर-फ़न आप हैं

“Full of pride, steeped in conceit, cruel and relentless in tyranny; full of deceit, rich in betrayal, cunning and crafty—such are you.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

आप घमंड और अहंकार से भरे हुए, ज़ुल्म व सितम ढाने वाले, और धोखे, फ़रेब तथा चालाकी व मक्कारी से भरपूर इंसान हैं।

विस्तार

इस शेर में आशिक़ अपने महबूब की तमाम बेरुख़ियों और चालबाज़ियों की एक लंबी फेहरिस्त गिना रहा है, जहाँ हर लफ़्ज़ 'पुर' (यानी भरा हुआ) से शुरू होकर उसकी ज्यादतियों को और गहरा दिखाता है। यहाँ ग़ुरूर, ज़ुल्म, धोखेबाज़ी और चालाकी का ऐसा ताना-बाना है जैसे महबूब दिल दुखाने के हर हुनर में माहिर हो। लेकिन इस तीखे शिकवे के पीछे सिर्फ़ नाराज़गी नहीं, बल्कि एक अजब सी बेबसी और महबूब के इस अंदाज़ पर आशिक़ की हैरानगी भी झलकती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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