अश्क ओ लख़्त-ए-जिगर आँखों में नहीं हैं मेरे हैं भरे लाल ओ गुहर इश्क़ के गंजीने में

“Not merely tears and fragments of the heart dwell in my eyes; they are rubies and pearls brimming in the treasury of love.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

मेरी आँखों में केवल आँसू और जिगर के टुकड़े नहीं हैं, बल्कि वे इश्क़ के ख़ज़ाने में भरे हुए लाल और मोती हैं।

विस्तार

शायर यहाँ अपने दर्द को कोई लाचारी या कमज़ोरी नहीं, बल्कि इश्क़ की अनमोल दौलत मानते हैं। उनकी आँखों से बहने वाले आँसू सादे पानी की बूँदें नहीं बल्कि चमकते मोती हैं, और दिल के ज़ख़्मों से रिसता लहू लाल (माणिक) बनकर इश्क़ के ख़ज़ाने को भर रहा है। यह शेर हमें बताता है कि सच्ची मोहब्बत में मिला दर्द इंसान को छोटा नहीं करता, बल्कि उसकी रूह को हीरे-मोतियों की तरह क़ीमती बना देता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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