“Harbor no grievance in your heart against Zafar, pure as a mirror; tell me, is there really any pleasure in taking away my life?”
आईने की तरह साफ़ दिल ज़फ़र के प्रति अपने मन में कोई बुरा ख़याल मत रखो; भला मेरी जान लेने में तुम्हें क्या मज़ा मिलेगा?
यहाँ ज़फ़र अपने वजूद और दिल की तुलना आईने से कर रहे हैं, जो पूरी तरह साफ़, पारदर्शी और किसी भी कपट से पाक होता है। वे अपने महबूब से बड़ी मासूमियत से इल्तिजा करते हैं कि जब मैं आईने की तरह बेदाग़ और बेज़रर हूँ, तो मेरे ख़िलाफ़ दिल में कोई रंजिश या मैल मत रखो। किसी इतने नाज़ुक और बेकस आशिक़ की जान लेने में भला क्या लुत्फ़ मिल सकता है? यह शेर समर्पण और दर्द की एक बहुत कोमल पुकार है।
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