“How could I not keep my heart polished and bright, / When the Beloved's radiant face is mirrored in its light?”
मैं अपने दिल को किस तरह साफ़ और पाक़ न रखूँ, जबकि इस आईने में मेरे महबूब का चेहरा जल्वागर (प्रकट) है।
सूफ़ी और ग़ज़ल की रिवायत में दिल को एक आईना माना गया है, जिसमें महबूब की झलक तभी दिखती है जब वह गर्द-ओ-ग़ुबार और अना से साफ़ हो। शायर प्यार से पूछता है कि भला वह अपने दिल को पाक़-ओ-साफ़ क्यों न रखे, जब ख़ुद उसके यार का नूरानी चेहरा इसमें जलवागर है। यह शे’र दिल को संवारने की ख़ूबसूरत बात करता है, जहाँ अपने अंदरूनी वजूद को पवित्र रखना ही इश्क़ की सबसे सच्ची इबादत बन जाता है।
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