इस अबरू ओ मिज़्गाँ से 'ज़फ़र' तेज़ ज़ियादा ख़ंजर न किसी का है न शमशीर किसी की

“Sharper than those arched brows and lashes, O Zafar, / Neither is anyone's dagger, nor anyone's sword.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

ऐ ज़फ़र, महबूब की भौंहों और पलकों से ज़्यादा तेज़ न तो किसी का ख़ंजर है और न ही किसी की तलवार।

विस्तार

उर्दू शायरी में महबूब की कमान जैसी भवों (अबरू) और तीखी पलकों (मिज़्गाँ) को खंजर और तलवार से तशबीह देने की पुरानी रिवायत रही है। ज़फ़र यहाँ बड़े सादे और दिलकश अंदाज़ में कहते हैं कि दुनिया की कोई भी धारदार तलवार या खंजर इतना गहरा ज़ख़्म नहीं दे सकता, जितनी महबूब की एक नज़र। यह शेर हुस्न के उस जादुई असर को दर्शाता है जो जिस्म को नहीं, बल्कि सीधे दिल और रूह को घायल कर देता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.