जो दिल से उधर जाए नज़र दिल हो गिरफ़्तार मुजरिम हो कोई और हो तक़्सीर किसी की

“Should the gaze stray from the heart, the heart is held captive; one commits the crime, yet another bears the blame.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

अगर निगाह उस तरफ़ जाए तो दिल गिरफ़्तार हो जाता है; यानी जुर्म कोई और (निगाह) करे और उसका क़सूरवार किसी और (दिल) को ठहराया जाए।

विस्तार

यहाँ शायर इश्क़ की एक बहुत प्यारी और बेबस नाइंसाफ़ी बयान कर रहा है। नज़रें तो महबूब की तरफ़ देख कर शरारत या ख़ता कर बैठती हैं, लेकिन इस जुर्म की सारी सज़ा बेचारे दिल को भुगतनी पड़ती है, जो मोहब्बत में क़ैद हो जाता है। यह शेर बड़ी नज़ाकत से दिखाता है कि आँखें देखने का गुनाह करती हैं, मगर तड़पने और गिरफ़्तार होने का इल्ज़ाम दिल के सर मढ़ दिया जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.