गिर्या भी है नाला भी है और आह-ओ-फ़ुग़ाँ भी पर दिल में हुई उस के न तासीर किसी की

“There is weeping, there is wailing, and sighs and cries of pain; yet upon that cruel heart, all influence proved in vain.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

रोना भी है, विलाप भी है और आहें व चीख-पुकार भी, लेकिन इनमें से किसी का भी उसके दिल पर कोई असर नहीं हुआ।

विस्तार

इस शे’र में आशिक़ अपने दर्द की हर इंतहा बयां कर रहा है—आँखों से बहते आँसू (गिर्या), तड़प भरी पुकार (नाला) और दिल से निकलती ठंडी आहें। मगर अफ़सोस कि दर्द का यह पूरा तूफ़ान भी उस संगदिल महबूब के दिल पर ज़रा सा भी असर नहीं कर सका। यह शे’र उस गहरी बेबसी की तस्वीर है, जहाँ अपने तमाम सच्चे जज़्बात उड़ेल देने के बाद भी सामने वाले की बेरुख़ी नहीं टूटती।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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