है दिल को जो याद आई फ़लक-ए-पीर किसी की आँखों के तले फिरती है तस्वीर किसी की

“O ancient sky, as the heart calls to mind someone once known, before my very eyes drifts the portrait of that someone.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

ऐ बूढ़े आसमान, दिल को जैसे ही किसी की याद आई है, आँखों के सामने उसी का चेहरा और तस्वीर घूम रही है।

विस्तार

शायर यहाँ सदियों पुराने आसमान यानी 'फ़लक-ए-पीर' को मुख़ातिब करके अपने दिल की बेबसी बयां कर रहा है, जो वक़्त और तक़दीर का भी प्रतीक है। जब दिल में किसी अज़ीज़ की याद अचानक जागती है, तो वह महज़ एक बीता हुआ ख़याल नहीं रहती, बल्कि उसका चेहरा आँखों के सामने एक जीवंत तस्वीर बनकर तैरने लगता है। यह शेर जुदाई और यादों की उस गहरी शिद्दत को दर्शाता है, जहाँ इंसान अपने गुज़रे हुए प्यार के तसव्वुर में पूरी तरह खो जाता है।

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