ग़ज़ल

ઇશારોય કેવો મભમ થઈ ગયો છે

इशाराय केवो मभम हो गयो है
अमृत घायल· Ghazal· 13 shers

यह ग़ज़ल किसी गहरे और रहस्यमय एहसास को बयां करती है, जहाँ कवि को अपनी भावनाओं के इज़हार में एक अजीब-सा मज़ा और विस्मय महसूस होता है। यह इश्क़ की उस अवस्था का वर्णन है जो न केवल दिल को छूती है, बल्कि मन को भी एक अनजाने सफर पर ले जाती है।

वीडियो · क्लासिक
वीडियो देखें →
गीत सुनें
लिपि व अर्थ
1
ઇશારોય કેવો મભમ થઈ ગયો છે! અગમ થઈ ગયો છે, નિગમ થઈ ગયો છે.
इशारा ही कैसा मुभम हो गया है! अगम हो गया है, निगम हो गया है।
संकेत ही कितना अस्पष्ट हो गया है! वह अगम्य हो गया है, और साथ ही ज्ञात भी हो गया है।
2
દૂભવવું એ દુનિયાનો ક્રમ થઈ ગયો છે; તડપવું એ દિલનો નિયમ થઈ ગયો છે.
दूबना यह दुनिया का क्रम हो गया है;तड़पना यह दिल का नियम हो गया है।
इस दुनिया में दुख पाना एक आम बात हो गई है, और तड़पना दिल का नियम बन गया है।
3
ફરી દિલનો ઘેરો જખમ થઈ ગયો છે; ચલિત પ્રેમ સાબિત કદમ થઈ ગયો છે.
फिर दिल का गहरा ज़ख़्म हो गया है;चलित प्रेम साबित क़दम हो गया है।
फिर से दिल का गहरा घाव हो गया है; चंचल प्रेम अब मज़बूत कदम बन गया है।
4
હવે ગમ હકીકતમાં ગમ થઈ ગયો છે; સુગમ કોયડો બહુ વિષમ થઈ ગયો છે.
अब ग़म हक़ीक़त में ग़म हो गया है;सुगम पहेली बहुत विषम हो गई है।
अब ग़म हकीकत में ग़म हो गया है; एक सुगम पहेली बहुत विषम हो गई है।
5
જખમ ખુદ જખમનો મલમ થઈ ગયો છે; ઘણી વાર એવોય ભ્રમ થઈ ગયો છે.
ज़ख़्म ख़ुद ज़ख़्म का मरहम हो गया है;कई बार ऐसा भी भ्रम हो गया है।
घाव खुद घाव का मरहम बन गया है; कई बार ऐसा भ्रम भी हो गया है।
6
અમે એક ફાટેલ પ્યાલો પીધો’તો, નવાઈ છે એ પણ હજમ થઈ ગયો છે.
हमने एक टूटा प्याला पिया था,हैरानी है, वो भी हज़म हो गया है।
हमने एक फटे प्याले से पिया था, यह आश्चर्य की बात है कि वह भी पच गया है।
7
નજર એમણે ફેરવી શું લીધી છે! જીવનમાં ઘણો કેફ કમ થઈ ગયો છે.
नज़र उन्होंने क्या फेर ली है!जीवन में कितना कैफ़ कम हो गया है।
जब उनकी नज़र फिर गई तो जीवन का बहुत सा कैफ़ कम हो गया।
8
અમારા જ હાથે અમારા જ માથે, ઘણી વાર ભારે સિતમ થઈ ગયો છે.
हमारे ही हाथों हमारे ही माथे,कई बार भारी सितम हो गया है।
अक्सर हमारे ही हाथों से, हमारे ही सिर पर, बहुत बड़ा अत्याचार हुआ है।
9
જુવાનીના સોગન! જુવાનીના મદમાં, જુવાની ઉપર પણ જુલમ થઈ ગયો છે.
जवानी की सौगंध! जवानी के मद में,जवानी पर भी ज़ुल्म हो गया है।
जवानी की सौगंध! जवानी के मद में, जवानी पर भी अन्याय हो गया है।
10
ઘણી વાર વેરણ દયા થઈ ગઈ છે, ઘણી વાર વેરી ધરમ થઈ ગયો છે.
कई बार वैरण दया हो गई है,कई बार वैरी धरम हो गया है।
कई बार दया ही शत्रु बन गई है, और अनेक बार धर्म भी विरोधी सिद्ध हुआ है।
11
નથી આંખમાં છાંટ સુધ્ધાં શરમની, જમાનોય બહુ બેશરમ થઈ ગયો છે!
न आँखों में शर्म की एक बूंद भी है,यह ज़माना भी बहुत बेशर्म हो गया है!
आँखों में शर्म का एक कतरा भी नहीं है, यह ज़माना भी बहुत बेशर्म हो गया है।
12
નહીં ચાલવા દે એ અંધેર આવું, નવાં માનવીનો જનમ થઈ ગયો છે.
यह अंधेर अब चलने नहीं देगा,नए मानवी का जनम हो गया है।
यह अंधेर अब चलने नहीं दिया जाएगा। एक नए मानव का जन्म हो गया है।
13
ન હો કેમ દર્દીલી ‘ઘાયલ’ની ગઝલો? દરદમાં જ પાગલ ખતમ થઈ ગયો છે.
न हों क्यों दर्दीली ‘घायल’ की गज़लें? दर्द में ही पागल ख़त्म हो गया है।
घायल की ग़ज़लें दर्द से भरी क्यों न हों? पागल (कवि) तो दर्द में ही समाप्त हो गया है।
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.