ग़ज़ल

વર્ષો જવાને જોઈએ

વર્ષો જવાને જોઈએ
अमृत घायल· Ghazal· 7 shers

यह ग़ज़ल समय के बीत जाने और जीवन की क्षणभंगुरता पर एक गहरा चिंतन प्रस्तुत करती है। शायर ने जीवन के उतार-चढ़ावों और समय के अथक प्रवाह के सामने मनुष्य की नश्वरता को दर्शाया है। यह कविता हमें वर्तमान में जीना और जीवन के हर पल को महत्व देना सिखाती है।

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लिपि व अर्थ
1
વર્ષો જવાને જોઈએ ત્યાં ક્ષણમાં જઈ ચડ્યો, આશ્ચર્ય વચ્ચે એમના આંગણ જઈ ચડ્યો!
वर्षों में जहाँ पहुँचना था, मैं क्षण में जा पहुँचा,आश्चर्य के बीच उनके आँगन जा पहुँचा!
जहाँ पहुँचने में वर्षों लग जाते, मैं वहाँ क्षण भर में पहुँच गया. उनके आश्चर्य के बीच, मैं उनके आँगन में जा पहुँचा.
2
પૂછો નહીં કે આજ તો ક્યાં નીકળી ગયો, કાજળને સ્પર્શવા જતા કામણમાં જઈ ચડ્યો!
पूछो नहीं कि आज मैं कहाँ निकल गया, काजल को छूने चला, कामन में जा फँस गया!
यह मत पूछो कि मैं आज कहाँ भटक गया; काजल को छूने गया था और उसके जादू में फँस गया।
3
અંધારમુક્ત થઈ ન શક્યો રોશની મહીં, આંખોમાં આંખ નાખી તો પાંપણમાં જઈ ચડ્યો!
अंधकार से मुक्त न हो सका रोशनी में भी,आँखों में आँख डाली तो पलकों में जा चढ़ा!
रोशनी में भी अंधेरे से मुक्ति न मिल सकी। जब आँखों में आँखें डालकर देखा, तो यह पलकों में ही जाकर अटक गया।
4
મનફાવે તેમ આભમાં ફંગોળતી રહી, હું ક્યાંય નહિ ને ગેબની ગોફણમાં જઈ ચડ્યો.
मनचाहे ढंग से आकाश में उछालती रही, मैं कहीं नहीं और अदृश्य की गोफण में जा पड़ा।
वह मुझे अपनी मर्ज़ी से आकाश में उछालती रही, और मैं कहीं न रहकर अदृश्य की गोफन में जा फँसा।
5
કૈં ચાંદની જ એવી હતી, ભાન ના રહ્યું; જાવું હતું સમુદ્ર ભણી, રણમાં જઈ ચડ્યો!
कुछ चाँदनी ही ऐसी थी, होश ना रहा; जाना था समुद्र की ओर, रेगिस्तान में जा पहुँचा!
चाँदनी इतनी मनमोहक थी कि मैं अपनी सुध-बुध खो बैठा। मुझे समुद्र की ओर जाना था, परंतु मैं रेगिस्तान में जा पहुँचा।
6
ન્હોતી ખબર જવાય નહીં એમ સ્વર્ગમાં; પ્હેર્યું હતું હું એ જ પહેરણમાં જ ચડ્યો!
नहीं थी खबर, ऐसे स्वर्ग में जाया नहीं जाता; पहना था जो, उसी पहरण में मैं चढ़ गया!
मुझे ज्ञात न था कि स्वर्ग में ऐसे नहीं जाया जाता; मैं उसी वस्त्र में ऊपर चला गया जो मैंने पहना हुआ था।
7
'ઘાયલ' ગયો'તો કેમ સુરાલયમાં શું કહું? ખૂબ જ હતો હું આજ વિમાસણમાં, જઈ ચડ્યો.
'घायल' मैं क्यों गया था मयखाने में, क्या कहूँ?आज मैं बहुत था दुविधा में, वहीं जा पहुँचा।
'घायल' सुरालय क्यों गया था, मैं क्या कहूँ? मैं आज बहुत दुविधा में था, बस वहीं जा पहुँचा।
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