अंधकार से मुक्त न हो सका रोशनी में भी,आँखों में आँख डाली तो पलकों में जा चढ़ा!

“Could not be freed from darkness even in light,When I looked into her eyes, it climbed into the eyelids!”

— अमृत घायल
अर्थ

रोशनी में भी अंधेरे से मुक्ति न मिल सकी। जब आँखों में आँखें डालकर देखा, तो यह पलकों में ही जाकर अटक गया।

विस्तार

यह शेर उस एहसास को बयां करता है जब कोई भावना इतनी गहरी हो जाती है कि उससे बाहर निकलना नामुमकिन हो जाता है। शायर कहते हैं कि रोशनी में भी अँधेरा पीछा नहीं छोड़ता। और जब आँखों का मिलन होता है, तो यह अँधेरा पलकों में बस जाता है। यह सिर्फ़ प्रेम की बात नहीं है, यह एक ऐसी भावनात्मक उलझन है जो हमारी आँखों के ज़रिए हमें घेर लेती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.