कुछ चाँदनी ही ऐसी थी, होश ना रहा; जाना था समुद्र की ओर, रेगिस्तान में जा पहुँचा!
“Such was the moonlight, I lost all sense; I had to go towards the sea, but ended up in the desert!”
— अमृत घायल
अर्थ
चाँदनी इतनी मनमोहक थी कि मैं अपनी सुध-बुध खो बैठा। मुझे समुद्र की ओर जाना था, परंतु मैं रेगिस्तान में जा पहुँचा।
विस्तार
ये शेर उस नशीली खूबसूरती की बात करता है, जो हमें अपना रास्ता भुला देती है। शायर कहते हैं कि चाँदनी में कुछ ऐसा जादू था, कि उनका होश ही उड़ गया। उन्हें तो समंदर की ओर जाना था, पर वो भटक गए... और रेगिस्तान में जा पहुँचे। यह बहुत गहरा एहसास है कि कभी-कभी मोह या आकर्षण हमें हमारी मंज़िल से बहुत दूर, किसी अनजान राह पर ले जाता है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
