'घायल' मैं क्यों गया था मयखाने में, क्या कहूँ?आज मैं बहुत था दुविधा में, वहीं जा पहुँचा।

“Why did 'Ghayal' go to the tavern, what can I convey?Deep in dilemma today, I just ended up that way.”

— अमृत घायल
अर्थ

'घायल' सुरालय क्यों गया था, मैं क्या कहूँ? मैं आज बहुत दुविधा में था, बस वहीं जा पहुँचा।

विस्तार

यह शेर उस मन की उलझन को बयां करता है जो किसी भावनात्मक तूफ़ान से गुज़रकर शांत होता है। शायर कहते हैं कि उन्हें खुद भी याद नहीं कि वह मयखाने में क्यों गए थे। वह बस इतना जानते हैं कि वह बहुत दुविधा में थे.... और फिर अपने आप उस जगह पहुँच गए। यह अपनी ही भावनाओं के आगे बेबस होने का एहसास है।

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