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ग़ज़ल

ખબર છે

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अमृत घायल· Ghazal· 9 shers

यह ग़ज़ल किसी रहस्यमय या अनकही भावना के बारे में है, जो दिल के किसी कोने में बस गई है। शायर उस एहसास को समझने की कोशिश करता है, जिसे न पूरी तरह समझा जा सकता है और न ही भुलाया जा सकता है। यह अहसास जीवन की जटिलताओं और अनिश्चितता को दर्शाता है।

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એને જ અમે નિત્ય ઉપાસી છે ખબર છે, આ મસ્તીનો અંજામ ઉદાસી છે ખબર છે.
उसी को हमने नित्य उपासा है, ख़बर है,इस मस्ती का अंजाम उदासी है, ख़बर है।
हमें मालूम है कि हमने हमेशा केवल उसी की उपासना की है, और यह भी मालूम है कि इस मस्ती का अंत उदासी है।
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આ વાતાવરણમાં જ છે તાસીર રતિની, નાડ એની મેં કૈં વાર તપાસી છે ખબર છે.
इस वातावरण में ही है रति की तासीर, नाड़ी उसकी मैंने कई बार जाँची है, ख़बर है।
प्रेम का वास्तविक स्वभाव इसी वातावरण में है, मैंने इसकी नब्ज़ कई बार जाँची है और मुझे इसकी पूरी जानकारी है।
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