पीते हैं स्वयं, उससे अधिक पिलाते हैं सबको,
'घायल' तो प्यासों के प्यासे हैं, खबर है।
“He drinks himself, yet makes all others drink much more, 'Ghayal' is thirsty for the thirsty, this is known for sure.”
— अमृत घायल
अर्थ
वह स्वयं पीता है, पर दूसरों को उससे अधिक पिलाता है। यह ज्ञात है कि 'घायल' तो प्यासों के प्यासे हैं।
विस्तार
यह शेर एहसास और त्याग की गहराई को बयान करता है। शायर कहते हैं कि इंसान अपनी ज़रूरतें पूरी करने के बाद भी, दूसरों को और ज़्यादा तड़पाता है। यह एक आत्म-समर्पण है! शायर 'घायल' बताते हैं कि वे खुद प्यासे नहीं हैं, बल्कि वे उन प्यासियों के लिए प्यासे हैं। यह निस्वार्थ प्रेम की एक बहुत ही खूबसूरत मिसाल है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
← Prev9 / 9
