कहीं अंजाम आ पहुँचा वफ़ा का घुला जाता हूँ अब के इम्तिहाँ में

“Has the final reckoning of devotion arrived at last? / I am dissolving away in this trial now.”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

शायद कहीं वफ़ा का अंजाम आ पहुँचा है, क्योंकि इस बार इम्तिहान में मैं पूरी तरह घुला जा रहा हूँ।

विस्तार

इस शे’र में इश्क़ और वफ़ा की आज़माइशों से पैदा होने वाली बेपनाह थकावट का ज़िक्र है। 'घुला जाता हूँ' का इज़हार बेहद ख़ूबसूरत है, जो बताता है कि तकलीफ़ शायर को बाहर से नहीं, बल्कि अंदर ही अंदर मोम की तरह पिघला रही है। उसे लगता है कि शायद वफ़ा का यह इम्तिहान अब अपने आख़िरी मुक़ाम पर पहुँच चुका है, जहाँ उसकी अपनी हस्ती ही मिटने की कगार पर है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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