“To plead with another in love was a shame and disgrace; / You granted the deep pull of my heart the reach to find your embrace.”
इश्क़ में किसी ग़ैर की मिन्नतें करना मेरे लिए अपमान की बात थी, लेकिन तूने मेरे दिल के आकर्षण (तड़प) को इतना असरदार बना दिया कि वह सीधे तुझ तक पहुँच सका।
इश्क़ में अपनी बात महबूब तक पहुँचाने के लिए किसी तीसरे की मिन्नतें करना आशिक़ को अपनी ग़ैरत के ख़िलाफ़ लगता है। यहाँ शायर अपने महबूब का शुक्रगुज़ार है कि उसने किसी बिचौलिए की ज़रूरत ही नहीं पड़ने दी। महबूब ने दिल की ख़ामोश कशिश और सच्चे तड़प को इतनी ताक़त बख़्शी कि वो सीधे उसके दिल तक पहुँच गई, जिससे मुहब्बत का वक़ार और आशिक़ की ख़ुद्दारी दोनों सलामत रहे।
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