जान थी इक वबाल फ़ुर्क़त में शौक़ को जाँ-गुज़ा किया तू ने

“In separation, life was already an affliction to bear; yet you turned my desire into a torment that consumes the soul.”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

जुदाई में ज़िंदगी पहले ही एक भारी मुसीबत बनी हुई थी, और तुमने मेरी तड़प को और भी जानलेवा बना दिया।

विस्तार

यहाँ शायर जुदाई के उस असहनीय दर्द को बयां कर रहा है, जहाँ सिर्फ़ ज़िंदा रहना ही किसी भारी मुसीबत जैसा लगता है। हद तो यह है कि महबूब ने मिलने की इस चाहत और आरज़ू को कम करने के बजाय इस क़दर भड़का दिया कि अब यह तड़प रूह को निचोड़ रही है। इश्क़ की यह वह दर्दनाक हालत है जहाँ उम्मीद और चाहत, जो ज़िंदगी का सहारा होनी चाहिए थीं, वही इंसान को आहिस्ता-आहिस्ता ख़त्म करने का सबब बन जाती हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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