“Veils enough were cast across the eyes already, yet You made beauty display itself.”
आँखों के आगे पहले ही कई परदे और रुकावटें थीं, फिर भी तूने हुस्न को ख़ुद को ज़ाहिर करने वाला बना दिया।
इस शेर में शायर माशूक़ या ख़ुदा से एक बड़ा दिलकश शिकवा करता है। वह कहता है कि हमारी आँखों के आगे तो पहले ही नासमझी और इंसानी कमज़ोरियों के अनगिनत पर्दे पड़े थे, फिर भी तुमने अपने हुस्न को इस क़दर नुमायाँ कर दिया कि निगाहें बेबस हो गईं। हुस्न जब ख़ुद को ज़ाहिर करने पर आमादा हो जाए, तो दिल का बेक़रार होना तय है—यह शेर उसी बेपनाह कशिश और जलवे की दास्तान सुनाता है।
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