जब दिया राह-रौ को ज़ौक़-ए-तलब सई को ना-रसा किया तू ने

“When You bestowed upon the traveler the passion to seek, You rendered all striving futile and unable to reach.”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

जब तूने मुसाफ़िर को तलाश का शौक़ दिया, तब तूने ही उसकी कोशिश को मंज़िल तक न पहुँचने वाला बना दिया।

विस्तार

यह शेर ज़िंदगी की एक बड़ी मार्मिक विडंबना को दर्शाता है, जहाँ शायर एक दोस्त की तरह खुदा से शिकवा कर रहा है। आपने मुसाफ़िर के दिल में मंज़िल की तलाश का ऐसा जुनून तो भर दिया, लेकिन साथ ही उसकी तमाम कोशिशों को अधूरा और नाक़ामयाब भी बना दिया। यह इंसान की उस बेबस दास्तान को छूता है जहाँ तड़प तो असीम दे दी गई, मगर मंज़िल हमेशा उसकी पहुँच से दो क़दम दूर ही रही।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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