अब शौक़ से बिगड़ के ही बातें किया करो कुछ पा गए हैं आप के तर्ज़-ए-बयाँ से हम

“Speak now in anger as freely as you please / For we have gleaned a secret from your very way of speech.”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

अब आप शौक से नाराज़ होकर ही बात किया कीजिए, क्योंकि हम आपके बात करने के अंदाज़ से बहुत कुछ समझ चुके हैं।

विस्तार

इस शेर में आशिक़ अपने महबूब की बनावटी नाराज़गी पर मुस्कुराते हुए चुटकी ले रहा है। महबूब भले ही रूठ कर या तल्ख़ लहजे में बात कर रहा हो, लेकिन आशिक़ ने उसके अंदाज़-ए-बयाँ में छिपी मोहब्बत और नरमी को पकड़ लिया है। अब वह बड़े इत्मीनान से कहता है कि आप बेझिझक ग़ुस्से से बोलिए, क्योंकि हम जान चुके हैं कि इस ख़फ़गी के पर्दे के पीछे भी सिर्फ़ प्यार ही छुपा है।

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